सूचना के अधिकार के बारे में समाजवादी पार्टी का दोहरा चरित्र उजागर
:सूचना के अधिकार का पत्र लौटाया
यूँ तो समाजवादी पार्टी राजनैतिक दलों को सूचना के अधिकार के दायरे में
लाने के केंद्रीय सूचना आयोग के फैसले का स्वागत कर रही है किन्तु यही
समाजवादी पार्टी स्वयं को सूचना के अधिकार के दायरे में लाने के प्रति
बास्तव में कतई भी गंभीर नहीं है l
समाजवादी पार्टी की कथनी की सत्यता जांचने के लिए मैंने दिनांक 13-06-13
को समाजवादी पार्टी के लखनऊ कार्यालय से सूचना मांगी थी lजन सूचना
अधिकारी - समाजवादी पार्टी ,19,विक्रमादित्य मार्ग,लखनऊ,उत्तर प्रदेश,पिन
कोड -226001 को पंजीकृत पत्र संख्या A RU 301995749IN दिनांक 14-06-13
के माध्यम से प्रेषित पत्र डाक विभाग की अभ्युक्ति "कार्यालय में इस
पदनाम का कोई नहीं है अतः बापस " के साथ मुझे बापस मिल गया है l इससे
स्पस्ट है कि समाजवादी पार्टी कहने को तो राजनैतिक दलों को सूचना के
अधिकार के दायरे में लाने के केंद्रीय सूचना आयोग के फैसले का स्वागत कर
रही है किन्तु यही समाजवादी पार्टी स्वयं को सूचना के अधिकार के दायरे
में लाने को तैयार नहीं है l इस प्रकार समाजवादी पार्टी का रवैया "पर
उपदेश कुशल बहुतेरे" की कहावत को चरितार्थ करता है l
मेरे अनुसार समाजवादी पार्टी भी अन्य राष्ट्रीय दलों यथा कॉंग्रेस,भारतीय
जनता पार्टी आदि से कतई भिन्न नहीं है और इस प्रकरण में ये सभी दल "चोर
चोर मौसेरे भाई" की कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं l राजनैतिक पार्टी की
कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए "चेक एंड बैलेंस सिस्टम" होना
आवश्यक है l राजनैतिक पार्टियाँ वैसे तो मात्र जनता के भले लिए काम
करने का दिखाबा करती हैं किन्तु उनके इस प्रकार के पारदर्शिता-विरोधी
कृत्य उनकी कथनी और करनी के अंतर को स्पस्ट कर देते हैं l यदि ये
पार्टियाँ जनता के ही लिए कार्य करती हैं तो उसी जनता से अपनी
कार्यप्रणाली को छुपाने का भला क्या मतलब हो सकता है l सामान्य रूप से
यह माना जाता है कि सत्तानशीन राजनैतिक दल सत्ता की शक्ति का प्रयोग कर
अवैध रूप से धन कमाकर उसे पार्टी फंड में स्वैच्छिक दान के रूप में जमा
दिखाकर सत्ता का दुरुपयोग करते हैं l राजनैतिक दलों का पारदर्शिता-विरोधी
रवैया इस अवधारणा की पुष्टि करता है l
पत्र और बापस प्राप्त लिफाफे की 3 स्कैन्ड कॉपी भी मेल के साथ अटैच्ड है l
उर्वशी शर्मा
सामाजिक कार्यकत्री
मोबाइल – 9369613513,8081898081,9455553838 rtimahilamanchup@gmail.com
Post: "indiaresists@lists.riseup.net"
Exit: "indiaresists-unsubscribe@lists.riseup.net"
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Tuesday, July 2, 2013
Re: [IAC#RG] सूचना के अधिकार के बारे में समाजवादी पार्टी का दोहरा चरित्र उजागर :सूचना के अधिकार का पत्र लौटाया
Re: [IAC#RG] सूचना के अधिकार के बारे में समाजवादी पार्टी का दोहरा चरित्र उजागर :सूचना के अधिकार का पत्र लौटाया
सूचना के अधिकार के बारे में समाजवादी पार्टी का दोहरा चरित्र उजागर
:सूचना के अधिकार का पत्र लौटाया
यूँ तो समाजवादी पार्टी राजनैतिक दलों को सूचना के अधिकार के दायरे में
लाने के केंद्रीय सूचना आयोग के फैसले का स्वागत कर रही है किन्तु यही
समाजवादी पार्टी स्वयं को सूचना के अधिकार के दायरे में लाने के प्रति
बास्तव में कतई भी गंभीर नहीं है l
समाजवादी पार्टी की कथनी की सत्यता जांचने के लिए मैंने दिनांक 13-06-13
को समाजवादी पार्टी के लखनऊ कार्यालय से सूचना मांगी थी lजन सूचना
अधिकारी - समाजवादी पार्टी ,19,विक्रमादित्य मार्ग,लखनऊ,उत्तर प्रदेश,पिन
कोड -226001 को पंजीकृत पत्र संख्या A RU 301995749IN दिनांक 14-06-13
के माध्यम से प्रेषित पत्र डाक विभाग की अभ्युक्ति "कार्यालय में इस
पदनाम का कोई नहीं है अतः बापस " के साथ मुझे बापस मिल गया है l इससे
स्पस्ट है कि समाजवादी पार्टी कहने को तो राजनैतिक दलों को सूचना के
अधिकार के दायरे में लाने के केंद्रीय सूचना आयोग के फैसले का स्वागत कर
रही है किन्तु यही समाजवादी पार्टी स्वयं को सूचना के अधिकार के दायरे
में लाने को तैयार नहीं है l इस प्रकार समाजवादी पार्टी का रवैया "पर
उपदेश कुशल बहुतेरे" की कहावत को चरितार्थ करता है l
मेरे अनुसार समाजवादी पार्टी भी अन्य राष्ट्रीय दलों यथा कॉंग्रेस,भारतीय
जनता पार्टी आदि से कतई भिन्न नहीं है और इस प्रकरण में ये सभी दल "चोर
चोर मौसेरे भाई" की कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं l राजनैतिक पार्टी की
कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए "चेक एंड बैलेंस सिस्टम" होना
आवश्यक है l राजनैतिक पार्टियाँ वैसे तो मात्र जनता के भले लिए काम
करने का दिखाबा करती हैं किन्तु उनके इस प्रकार के पारदर्शिता-विरोधी
कृत्य उनकी कथनी और करनी के अंतर को स्पस्ट कर देते हैं l यदि ये
पार्टियाँ जनता के ही लिए कार्य करती हैं तो उसी जनता से अपनी
कार्यप्रणाली को छुपाने का भला क्या मतलब हो सकता है l सामान्य रूप से
यह माना जाता है कि सत्तानशीन राजनैतिक दल सत्ता की शक्ति का प्रयोग कर
अवैध रूप से धन कमाकर उसे पार्टी फंड में स्वैच्छिक दान के रूप में जमा
दिखाकर सत्ता का दुरुपयोग करते हैं l राजनैतिक दलों का पारदर्शिता-विरोधी
रवैया इस अवधारणा की पुष्टि करता है l
पत्र और बापस प्राप्त लिफाफे की 3 स्कैन्ड कॉपी भी मेल के साथ अटैच्ड है l
उर्वशी शर्मा
सामाजिक कार्यकत्री
मोबाइल – 9369613513,8081898081,9455553838 rtimahilamanchup@gmail.com
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Re: [IAC#RG] Frivolous "time pass" discussions on mailing lists
From: deshbhakti andolan <deshbhaktiandolan@gmail.com>
To: indiaresists@lists.riseup.net
Sent: Monday, 1 July 2013 3:54 PM
Subject: Re: [IAC#RG] Frivolous "time pass" discussions on mailing lists
attn mr sarbajit roy, iacyou must read yesterday's report in the indian express completely exposing aap and kejriwal. the man stays in central govt quarters in gaziabhad alloted to his wife, who is in IT dept, but has falsely given his address as sunder nagari, new delhi. what a fraud on the voters!!!!s balakrishnanDeshbhakti AndolanOn 27 June 2013 16:27, Sarbajit Roy <sroy.mb@gmail.com> wrote:
We have received many emails asking for the IAC list(s) to be reactivated.
This was one of many issues discussed at IAC's conference for its "operations side" members which took place last week. About 600 persons participated.
The postings made by various persons over the IAC's email lists over the last 9 months were discussed in considerable detail. It was resolved that the list(s) may continue but henceforth only such messages ought to be circulated which have a tendency to promote / disseminate the core ideologies / values of India Against Corruption and/or Hindustan Republican Association's mission.
Some conclusions from the meeting may be disclosed in due course.
Post: "indiaresists@lists.riseup.net"
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[IAC#RG] GOVERNMENT MACHINERY DERAILS THE RTI ACT
While in the initial period, the government departments were responding to RTI queries within the stipulated time, in recent time, many government departments are reported to be not even acknowledging the RTI letters. This particularly happens, in the case of RTI queries relating to difficult matter for the government.
Recently, I interacted with number of RTI activists and others and found that most of them have become frustrated, since even any appeal to Information Commissioners are reported to not eliciting quick response and many times no response at all.
What is the alternate course for the citizens ? An average citizen busy with the pre occupation of getting a living , cannot go to court to demand reply for the RTI query.
The problem is that the government enact a law and then the government machinery itself derail the law.
N.S.Venkataraman
Nandini Voice For The Deprived
email:- nsvenkatchennai@gmail.com
Re: [IAC#RG] सूचना के अधिकार के बारे में समाजवादी पार्टी का दोहरा चरित्र उजागर :सूचना के अधिकार का पत्र लौटाया
Sent from my BlackBerry® on Reliance Mobile, India's No. 1 Network. Go for it!
-----Original Message-----
From: urvashi sharma <rtimahilamanchup@gmail.com>
Sender: indiaresists-request@lists.riseup.net
Date: Mon, 1 Jul 2013 11:41:58
Reply-To: indiaresists@lists.riseup.net
Subject: [IAC#RG] सूचना के अधिकार के बारे में समाजवादी पार्टी का दोहरा चरित्र उजागर :सूचना के अधिकार का पत्र लौटाया
सूचना के अधिकार के बारे में समाजवादी पार्टी का दोहरा चरित्र उजागर
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यूँ तो समाजवादी पार्टी राजनैतिक दलों को सूचना के अधिकार के दायरे में
लाने के केंद्रीय सूचना आयोग के फैसले का स्वागत कर रही है किन्तु यही
समाजवादी पार्टी स्वयं को सूचना के अधिकार के दायरे में लाने के प्रति
बास्तव में कतई भी गंभीर नहीं है l
समाजवादी पार्टी की कथनी की सत्यता जांचने के लिए मैंने दिनांक 13-06-13
को समाजवादी पार्टी के लखनऊ कार्यालय से सूचना मांगी थी lजन सूचना
अधिकारी - समाजवादी पार्टी ,19,विक्रमादित्य मार्ग,लखनऊ,उत्तर प्रदेश,पिन
कोड -226001 को पंजीकृत पत्र संख्या A RU 301995749IN दिनांक 14-06-13
के माध्यम से प्रेषित पत्र डाक विभाग की अभ्युक्ति "कार्यालय में इस
पदनाम का कोई नहीं है अतः बापस " के साथ मुझे बापस मिल गया है l इससे
स्पस्ट है कि समाजवादी पार्टी कहने को तो राजनैतिक दलों को सूचना के
अधिकार के दायरे में लाने के केंद्रीय सूचना आयोग के फैसले का स्वागत कर
रही है किन्तु यही समाजवादी पार्टी स्वयं को सूचना के अधिकार के दायरे
में लाने को तैयार नहीं है l इस प्रकार समाजवादी पार्टी का रवैया "पर
उपदेश कुशल बहुतेरे" की कहावत को चरितार्थ करता है l
मेरे अनुसार समाजवादी पार्टी भी अन्य राष्ट्रीय दलों यथा कॉंग्रेस,भारतीय
जनता पार्टी आदि से कतई भिन्न नहीं है और इस प्रकरण में ये सभी दल "चोर
चोर मौसेरे भाई" की कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं l राजनैतिक पार्टी की
कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए "चेक एंड बैलेंस सिस्टम" होना
आवश्यक है l राजनैतिक पार्टियाँ वैसे तो मात्र जनता के भले लिए काम
करने का दिखाबा करती हैं किन्तु उनके इस प्रकार के पारदर्शिता-विरोधी
कृत्य उनकी कथनी और करनी के अंतर को स्पस्ट कर देते हैं l यदि ये
पार्टियाँ जनता के ही लिए कार्य करती हैं तो उसी जनता से अपनी
कार्यप्रणाली को छुपाने का भला क्या मतलब हो सकता है l सामान्य रूप से
यह माना जाता है कि सत्तानशीन राजनैतिक दल सत्ता की शक्ति का प्रयोग कर
अवैध रूप से धन कमाकर उसे पार्टी फंड में स्वैच्छिक दान के रूप में जमा
दिखाकर सत्ता का दुरुपयोग करते हैं l राजनैतिक दलों का पारदर्शिता-विरोधी
रवैया इस अवधारणा की पुष्टि करता है l
पत्र और बापस प्राप्त लिफाफे की 3 स्कैन्ड कॉपी भी मेल के साथ अटैच्ड है l
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सामाजिक कार्यकत्री
मोबाइल – 9369613513,8081898081,9455553838 rtimahilamanchup@gmail.com
Monday, July 1, 2013
Re: [IAC#RG] Frivolous "time pass" discussions on mailing lists
We have received many emails asking for the IAC list(s) to be reactivated.
This was one of many issues discussed at IAC's conference for its "operations side" members which took place last week. About 600 persons participated.
The postings made by various persons over the IAC's email lists over the last 9 months were discussed in considerable detail. It was resolved that the list(s) may continue but henceforth only such messages ought to be circulated which have a tendency to promote / disseminate the core ideologies / values of India Against Corruption and/or Hindustan Republican Association's mission.
Some conclusions from the meeting may be disclosed in due course.
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Sunday, June 30, 2013
[IAC#RG] सूचना के अधिकार के बारे में समाजवादी पार्टी का दोहरा चरित्र उजागर :सूचना के अधिकार का पत्र लौटाया
:सूचना के अधिकार का पत्र लौटाया
यूँ तो समाजवादी पार्टी राजनैतिक दलों को सूचना के अधिकार के दायरे में
लाने के केंद्रीय सूचना आयोग के फैसले का स्वागत कर रही है किन्तु यही
समाजवादी पार्टी स्वयं को सूचना के अधिकार के दायरे में लाने के प्रति
बास्तव में कतई भी गंभीर नहीं है l
समाजवादी पार्टी की कथनी की सत्यता जांचने के लिए मैंने दिनांक 13-06-13
को समाजवादी पार्टी के लखनऊ कार्यालय से सूचना मांगी थी lजन सूचना
अधिकारी - समाजवादी पार्टी ,19,विक्रमादित्य मार्ग,लखनऊ,उत्तर प्रदेश,पिन
कोड -226001 को पंजीकृत पत्र संख्या A RU 301995749IN दिनांक 14-06-13
के माध्यम से प्रेषित पत्र डाक विभाग की अभ्युक्ति "कार्यालय में इस
पदनाम का कोई नहीं है अतः बापस " के साथ मुझे बापस मिल गया है l इससे
स्पस्ट है कि समाजवादी पार्टी कहने को तो राजनैतिक दलों को सूचना के
अधिकार के दायरे में लाने के केंद्रीय सूचना आयोग के फैसले का स्वागत कर
रही है किन्तु यही समाजवादी पार्टी स्वयं को सूचना के अधिकार के दायरे
में लाने को तैयार नहीं है l इस प्रकार समाजवादी पार्टी का रवैया "पर
उपदेश कुशल बहुतेरे" की कहावत को चरितार्थ करता है l
मेरे अनुसार समाजवादी पार्टी भी अन्य राष्ट्रीय दलों यथा कॉंग्रेस,भारतीय
जनता पार्टी आदि से कतई भिन्न नहीं है और इस प्रकरण में ये सभी दल "चोर
चोर मौसेरे भाई" की कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं l राजनैतिक पार्टी की
कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए "चेक एंड बैलेंस सिस्टम" होना
आवश्यक है l राजनैतिक पार्टियाँ वैसे तो मात्र जनता के भले लिए काम
करने का दिखाबा करती हैं किन्तु उनके इस प्रकार के पारदर्शिता-विरोधी
कृत्य उनकी कथनी और करनी के अंतर को स्पस्ट कर देते हैं l यदि ये
पार्टियाँ जनता के ही लिए कार्य करती हैं तो उसी जनता से अपनी
कार्यप्रणाली को छुपाने का भला क्या मतलब हो सकता है l सामान्य रूप से
यह माना जाता है कि सत्तानशीन राजनैतिक दल सत्ता की शक्ति का प्रयोग कर
अवैध रूप से धन कमाकर उसे पार्टी फंड में स्वैच्छिक दान के रूप में जमा
दिखाकर सत्ता का दुरुपयोग करते हैं l राजनैतिक दलों का पारदर्शिता-विरोधी
रवैया इस अवधारणा की पुष्टि करता है l
पत्र और बापस प्राप्त लिफाफे की 3 स्कैन्ड कॉपी भी मेल के साथ अटैच्ड है l
उर्वशी शर्मा
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